रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से एक ऐसी ऐतिहासिक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के समीकरण बदल दिए हैं। यूक्रेन द्वारा रूस की कई बड़ी तेल रिफाइनरियों पर किए गए ताबड़तोड़ ड्रोन हमलों के बाद अब रूस खुद तेल संकट (Fuel Shortage) से जूझ रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि कच्चे तेल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश रूस, अब अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से पेट्रोल आयात (Import) करने पर मजबूर हो गया है। रूस के 11 टाइम जोन में इस समय ईंधन की भारी किल्लत महसूस की जा रही है, कई शहरों में तेल की राशनिंग शुरू हो गई है, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

शिपिंग डेटा में भारत का रिकॉर्ड और रॉयटर्स का बड़ा खुलासा
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रूस ने भारत से समंदर के रास्ते पेट्रोल का आयात आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने भी पुष्टि की है कि रूस इस संकट से निपटने के लिए मित्र देशों के संपर्क में है और सही कीमतों पर ईंधन आयात करने की चर्चा चल रही है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि शिपिंग डेटा (Kpler और LSEG) के अनुसार, भारत ने जून 2026 में रूस से रोजाना करीब 27 लाख बैरल कच्चे तेल (Crude Oil) का रिकॉर्ड आयात किया था। जून महीने में भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी आधी से अधिक यानी 50% से ज्यादा हो गई, जो मई में महज 36.5% थी। यानी भारत जिस रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, अब उसी रूस को रिफाइंड पेट्रोल वापस बेच रहा है।
भारत से रवाना हुए दो बड़े जहाजी बेड़े
रक्षा और व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, भारत से कम से कम 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल रूस के लिए रवाना किया जा चुका है। अन्य सूत्रों ने पुष्टि की है कि 30,000 से 40,000 टन क्षमता वाले दो अलग-अलग तेल टैंकर (जहाज) भारत के बंदरगाहों से रूस के लिए भेजे गए हैं। हालांकि, सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि भारत की कौन सी रिफाइनरी कंपनी (सरकारी या निजी) रूस को इस ईंधन की सप्लाई कर रही है।
रूस की योजना हर महीने अलग-अलग देशों से कुल 400,000 टन पेट्रोल आयात करने की है। रूस में गर्मियों के मौसम में ईंधन की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जहां रोजाना कम से कम 110,000 टन पेट्रोल की भारी खपत होती है।
पुतिन ने कबूली ड्रोन हमलों की बात, बेलारूस भी आया आगे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कैबिनेट मंत्रियों और अधिकारियों के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक में यह खुले तौर पर स्वीकार किया है कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण देश की तेल रिफाइनरियों को बुनियादी तौर पर भारी नुकसान पहुंचा है। इसकी वजह से कई क्षेत्रों में ईंधन की किल्लत हुई है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि रूस इस संकट से मुस्तैदी से निपट रहा है।
इस संकट की घड़ी में रूस के पड़ोसी देश बेलारूस ने भी बड़ी मदद की है। आंकड़ों के मुताबिक, बेलारूस ने जून के पहले 15 दिनों में रेलवे नेटवर्क के जरिए रूस को भेजी जाने वाली पेट्रोल सप्लाई को मई के मुकाबले लगभग तीन गुना बढ़ा दिया है, जो अब 70,000 टन से ज्यादा हो चुकी है। वैश्विक भू-राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस संकट में भारत की रिफाइनिंग क्षमता रूस के लिए एक बड़ा जीवनदान साबित हो रही है।
