भारत और अमेरिका के बीच होने वाले आगामी बड़े व्यापारिक समझौते के आधिकारिक ऐलान से ठीक पहले एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। दोनों देशों के बीच चल रहे टैरिफ विवाद को सुलझाने और द्विपक्षीय रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत की चार प्रमुख कंपनियों से प्रतिबंध (बैन) हटाने का एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने इन चारों भारतीय कंपनियों को अपनी ‘स्पेशली डेजिग्नेटेड नेशनल्स’ लिस्ट से तत्काल प्रभाव से बाहर कर दिया है।

SDN लिस्ट से बाहर होने का क्या है मतलब?
अमेरिकी वित्त विभाग की इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण सूची (SDN List) में जिन कंपनियों या व्यक्तियों का नाम शामिल किया जाता है, उनकी अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी संपत्तियों (Properties) और वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह से फ्रीज (जब्त) कर दिया जाता है। इस सूची से बाहर होने के बाद अब इन भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक व्यापार और अमेरिकी बाजार के रास्ते दोबारा पूरी तरह खुल गए हैं।
इन 4 भारतीय कंपनियों को मिली बड़ी राहत
प्रतिबंधों की सूची से हटाई गई कंपनियों में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की दिग्गज फर्में शामिल हैं, जिनमें से दो शेयर बाजार में लिस्टेड (सार्वजनिक) कंपनियां भी हैं:
गैलेक्सी बेयरिंग्स लिमिटेड (अहमदाबाद): सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध (Publicly Listed) प्रमुख बेयरिंग निर्माता कंपनी।
लोकेश मशीन्स लिमिटेड (हैदराबाद): शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी, जिसके ग्राहकों की सूची में जॉन डीरे (अमेरिका), कमिंस (अमेरिका), वोल्वो (स्वीडन) और होंडा व सुजुकी (जापान) जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं।
आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद): भारत के विमानन (एविएशन) और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण कंपनी।
शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (दिल्ली): एरोनॉटिक्स और डिफेंस-एविएशन सेक्टर की कंपनी।
2 साल पहले रूसी कनेक्शन के आरोप में लगा था बैन
यह पूरा मामला करीब दो साल पुराना है। वर्ष 2024 में अमेरिकी विदेश संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने एक कार्यकारी आदेश जारी करते हुए 21 भारतीय संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें 19 कंपनियां और दो भारतीय नागरिक शामिल थे। वाशिंगटन की यह दंडात्मक कार्रवाई वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद मॉस्को पर लगाए गए वैश्विक प्रतिबंधों के उल्लंघन को रोकने के प्रयासों का एक हिस्सा थी। इन कंपनियों पर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से रूसी सरकार की मदद करने या उन्हें तकनीकी सामान की आपूर्ति करने का आरोप लगा था।
भारत सरकार की कूटनीतिक बातचीत लाई रंग
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया था और नई दिल्ली ने वाशिंगटन के साथ इस मुद्दे पर लगातार उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत जारी रखी थी। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बेहद जिम्मेदार सदस्य है और वह किसी भी अवैध व्यापारिक गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की बातचीत अब अपने आखिरी चरण में है, ऐसे में ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत-अमेरिका के आर्थिक व रणनीतिक रिश्तों को एक नई और मजबूत दिशा देगा।
