पिछले साढ़े तीन महीनों (107 दिनों) से मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तबाही मचा रहे अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार ऐतिहासिक शांति समझौता (Peace Deal) हो गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार को संकट में डालने वाले इस भीषण युद्ध की समाप्ति का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुले दिल से स्वागत किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट (X) कर इस समझौते को वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते पूरी दुनिया को भारी आर्थिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस डील के बाद क्षेत्र में न केवल शांति बहाल होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नेविगेशन की स्वतंत्रता (आवाजाही की आजादी) भी सुनिश्चित होगी।

14 मुद्दों पर बनी महा-सहमति, 19 जून को जिनेवा में डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में होंगे दस्तखत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस महा-समझौते का आधिकारिक एलान किया। इस ऐतिहासिक डील के तहत अमेरिका और ईरान के बीच कुल 14 संवेदनशील मुद्दों पर पूर्ण सहमति बन चुकी है। इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आगामी 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा (Geneva) में एक भव्य हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वयं मौजूद रहने की प्रबल संभावना है।
होर्मुज से तुरंत हटेगी अमेरिकी नाकेबंदी, फारस की खाड़ी में फंसे 13 भारतीय जहाजों को मिलेगी बड़ी राहत
इस शांति समझौते का सबसे बड़ा और तत्काल असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर देखने को मिलेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि समझौते के लागू होते ही होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी को तुरंत हटा लिया जाएगा और इसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
ब्लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण युद्ध और नाकेबंदी के कारण वर्तमान में फारस की खाड़ी और होर्मुज के मुहाने पर दुनिया के 600 से अधिक विशाल कमर्शियल जहाज फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह ठप पड़ गई थी और ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन फंसे हुए जहाजों में भारत के भी करीब 13 बड़े व्यापारिक जहाज शामिल हैं, जिन्हें अब सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता मिल सकेगा।
28 फरवरी को अली खामेनेई की मौत के साथ शुरू हुआ था महा-युद्ध
गौरतलब है कि इस विनाशकारी अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल की वायुसेना ने संयुक्त रूप से ईरान पर एक भीषण और अचूक हवाई हमला किया था। इस हमले में ईरान के सैन्य ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर दिया गया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष ईरानी नेताओं की मौत हो गई थी।
इस ऐतिहासिक क्षति के बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए मध्य-पूर्व में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों को निशाना बनाया था और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके वहां से गुजरने वाले (विशेषकर भारतीय क्रू मेंबर्स वाले) कमर्शियल जहाजों पर आत्मघाती ड्रोन दागे थे। अब 107 दिनों के रक्तपात और आर्थिक नुकसान के बाद, पीएम मोदी ने उम्मीद जताई है कि जिनेवा में होने वाली इस वार्ता से दोनों देशों के बीच एक स्थायी और अंतिम शांति स्थापित हो सकेगी।
