पश्चिम एशिया के ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग का खामियाजा एक बार फिर निर्दोष भारतीय नाविकों को भुगतना पड़ा है। भारत सरकार द्वारा दर्ज कराए गए कड़े राजनयिक विरोध और आपत्ति को पूरी तरह दरकिनार करते हुए, 12-13 जून की दरमियानी रात होर्मुज से गुजर रहे पूर्ण रूप से भारतीय चालक दल (क्रू) द्वारा संचालित एक और कमर्शियल तेल टैंकर पर आत्मघाती ड्रोन हमला किया गया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भीषण हमले में जहाज को तो भारी नुकसान पहुंचा है, लेकिन सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित और बाल-बाल बच गए हैं।

अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था (NCAGS) के बावजूद हुआ हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हमले का शिकार हुआ जहाज ‘बोकेम मरेंगो’ (Bochem Marengo) है, जो हांगकांग के झंडे तले चलने वाला एक रासायनिक और तेल टैंकर है। इस जहाज के प्रबंधन की जिम्मेदारी ‘एंग्लो-ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड’ के पास है और इस पर सवार सभी नाविक भारतीय नागरिक हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह जहाज अमेरिकी नौसेना की सीधी निगरानी और अमेरिकी NCAGS (Naval Cooperation and Guidance for Shipping) सुरक्षा कवच के तहत इस समुद्री मार्ग से गुजर रहा था, इसके बावजूद एक अज्ञात मानवरहित ड्रोन ने इसे निशाना बना लिया।
जहाज के तीन मुख्य हिस्से क्षतिग्रस्त, मरम्मत के लिए UAE पहुंचा टैंकर
इस ड्रोन हमले में जहाज के तीन महत्वपूर्ण हिस्से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जहाज का संतुलन बनाने वाले नंबर-1 और नंबर-2 पोर्ट वाटर बैलास्ट टैंक को भारी नुकसान पहुंचा है, साथ ही रासायनिक ईंधन रखने वाला नंबर-2 पोर्ट कार्गो टैंक भी हमले की जद में आ गया। हालांकि, इस गंभीर क्षति के बावजूद जहाज समुद्र में डूबा नहीं और सूझबूझ के साथ अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। आपातकालीन रिस्पांस टीम और यूकेएमटीओ (UKMTO) को सूचित करने के बाद जहाज को सुरक्षित रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह बंदरगाह पर पहुंचा दिया गया है, जहां शिपिंग कंपनी की विशेष टीम इसकी जांच और मरम्मत में जुट गई है।
भारत की आपत्ति पर झुका नहीं अमेरिका, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दी चेतावनी
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इससे ठीक दो दिन पहले पलाउ के झंडे वाले आम व्यापारी जहाज ‘एमटी सेटेबेल्लो’ (MT Settebello) पर अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई मिसाइल बमबारी में 3 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को फोन कर कड़ा ऐतराज जताया था और दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को भी तलब (Summon) किया गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोटूक कहा था कि कमर्शियल जहाजों पर जानलेवा बल का प्रयोग तुरंत रुकना चाहिए।
लेकिन, शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को वापस फोन कर अपनी कूटनीतिक ‘दादागीरी’ का परिचय देते हुए रुख और सख्त कर लिया। रुबियो ने इस जानलेवा हमले पर माफी मांगने के बजाय भारत को साफ लहजे में चेतावनी दे दी कि “अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर लागू अपनी सैन्य नाकेबंदी का किसी भी कीमत पर उल्लंघन बर्दाश्त नहीं करेगा।” अमेरिका की इस अड़ियल और आक्रामक नीति ने एक तरफ जहां भारत-अमेरिका संबंधों को भारी दबाव में ला दिया है, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज के मुहाने पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
