देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय रिजर्व बैंक ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक अहम पहल की रूपरेखा तैयार की है। केंद्रीय बैंक का मकसद अब केवल बैंकिंग सिस्टम को स्थिर रखना नहीं, बल्कि आम ग्राहकों को डिजिटल फ्रॉड के जोखिम से भी मजबूत सुरक्षा देना है।

हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आरबीआई ने संकेत दिए हैं कि ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को आर्थिक राहत देने के लिए एक नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी ग्राहक को डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है, तो उसे एक तय सीमा तक मुआवजा मिल सकता है। इससे बैंकों की जिम्मेदारी भी तय होगी और उन्हें साइबर सुरक्षा को लेकर ज्यादा सख्त कदम उठाने होंगे।
आरबीआई गवर्नर ने अपने संबोधन में कहा कि देश का बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन डिजिटल युग में खतरे भी उसी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी कारण नियामक अब ऐसे नियमों पर काम कर रहा है, जो खासतौर पर बुजुर्गों और तकनीक से कम परिचित ग्राहकों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकें। डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए एक विस्तृत चर्चा पत्र भी लाने की तैयारी है, जिसमें ट्रांजेक्शन लिमिट और सुरक्षा उपायों पर सुझाव शामिल होंगे।

मौद्रिक नीति के मोर्चे पर आरबीआई ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट को स्थिर रखते हुए केंद्रीय बैंक ने यह संकेत दिया कि उसकी नजर महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों पर संतुलन बनाए रखने पर है। दिसंबर में की गई कटौती के बाद मौजूदा दर को जारी रखना बाजार के लिए स्थिरता का संकेत माना जा रहा है।
आर्थिक वृद्धि को लेकर आरबीआई ने आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि पूरे वित्त वर्ष के अनुमान को नई जीडीपी सीरीज आने तक टाल दिया गया है, लेकिन शुरुआती तिमाहियों में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण होता है, तो इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, आरबीआई की यह पहल केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित, भरोसेमंद और आम लोगों के लिए सहज बनाना है।
