पश्चिम एशिया का रणक्षेत्र अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ कूटनीति की जगह केवल विनाशकारी धमकियों ने ले ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को उड़ाने की सीधी चेतावनी के बाद तेहरान ने बेहद कड़ा पलटवार किया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ ने वॉशिंगटन को आगाह करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका बेंजामिन नेतन्याहू के नक्शेकदम पर चलता रहा, तो वह ‘जलकर राख’ हो जाएगा। गालिबफ ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन इजरायली दबाव में आकर पूरे क्षेत्र को एक ‘जीते-जागते नरक’ में धकेल रहा है, जिसका परिणाम खुद अमेरिका के लिए भी आत्मघाती होगा।

तनाव की शुरुआत ट्रंप के उस ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने मंगलवार को ‘पावर प्लांट और ब्रिज डे’ घोषित कर दिया। ट्रंप ने अल्टिमेटम देते हुए लिखा कि यदि 6 अप्रैल तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को नहीं खोला गया, तो मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) ईरान वो तबाही देखेगा जो उसने पहले कभी नहीं देखी होगी। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में यहाँ तक कह दिया कि वे ईरान के ‘तेल पर कब्जा’ करने और सब कुछ नष्ट करने पर विचार कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ‘पाषाण युगीन’ व्यवहार पर थाईलैंड स्थित ईरानी दूतावास ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप की भाषा दर्शाती है कि अमेरिका उम्मीद से पहले ही खुद ‘पाषाण युग’ में पहुँच चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयानबाजी अब केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) तक सीमित नहीं रही है। ट्रंप ने ईरानी वार्ताकारों को दी गई छूट खत्म करने और सीधी सैन्य कार्रवाई की जो समय-सीमा तय की है, उसने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है और किसी भी हमले का जवाब उसी की भाषा में दिया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन है, अब एक ऐसे बारूद के ढेर पर खड़ी है जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक महायुद्ध का सबब बन सकती है। अगले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक और विनाशकारी सैन्य टकराव देखेगी या परदे के पीछे चल रही कोई बातचीत इस प्रलय को रोक पाएगी।
