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विकास की नई दिशा: पीएम मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात में रखा भारत का भविष्य मॉडल

राजकोट में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय समिट ने इस बार सिर्फ निवेश के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि भारत की बदलती आर्थिक पहचान पर भी रोशनी डाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से यह संदेश दिया कि गुजरात अब केवल औद्योगिक राज्य नहीं रहा, बल्कि वह भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का एक अहम प्रवेश द्वार बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि बीते वर्षों में भारत ने जिस तेज़ी से आर्थिक विस्तार किया है, उसमें गुजरात की भूमिका निर्णायक रही है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को केवल एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही है। इस भरोसे के पीछे स्थिर नीतियां, मजबूत बुनियादी ढांचा और निवेश के लिए अनुकूल माहौल प्रमुख कारण हैं।

<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="en" dir="ltr">Glad to have attended the Vibrant Gujarat Regional Conference for Kutch and Saurashtra in Rajkot earlier today. This platform will encourage growth and investment in these regions and create employment opportunities for the youth. <a href="https://t.co/w5yTfi6Va0">pic.twitter.com/w5yTfi6Va0</a></p>&mdash; Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/2010360916949475672?ref_src=twsrc%5Etfw">January 11, 2026</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>

राजकोट और आसपास के क्षेत्रों में विकसित किए गए नए औद्योगिक क्लस्टरों का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि क्षेत्रीय विकास ही समावेशी विकास की असली कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विस्तार का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे और मझोले शहर भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ें, यही सरकार की प्राथमिकता है।

प्रधानमंत्री ने ‘विकास और विरासत’ की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आधुनिक भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखते हुए भविष्य की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यही संतुलन भारत को अन्य अर्थव्यवस्थाओं से अलग बनाता है और यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी की इच्छुक हैं।

समिट के माहौल में उद्योग, निवेश और नीति के साथ-साथ आत्मविश्वास भी साफ झलक रहा था। राजकोट से दिया गया यह संदेश सिर्फ गुजरात के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए था कि भारत अब वैश्विक आर्थिक मंच पर निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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