पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कई देशों की नजर अब कूटनीतिक समाधान पर टिकी हुई है। इस बीच भारत में संयुक्त अरब अमीरात के पूर्व राजदूत Hussain Hassan Mirza ने कहा है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री Narendra Modi की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत छवि और कई देशों के साथ करीबी संबंध संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
एक इंटरव्यू में मिर्जा ने कहा कि वर्तमान हालात केवल सैन्य कार्रवाई से हल नहीं हो सकते और क्षेत्रीय शक्तियों को बातचीत के रास्ते तलाशने होंगे। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र के कई देश नहीं चाहते कि यह संघर्ष लंबा चले, क्योंकि इसका असर सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है।

मिर्जा के मुताबिक United Arab Emirates जैसे देश इस बात के पक्ष में हैं कि किसी भी तरह से तनाव कम हो और स्थिरता कायम रहे। उन्होंने कहा कि यूएई के दोनों पक्षों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं, इसलिए वह क्षेत्रीय शांति के प्रयासों का समर्थन करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का कई वैश्विक नेताओं के साथ सीधा संवाद है, जिसमें Iran और Israel के नेतृत्व के साथ भी संपर्क शामिल है। ऐसे में यदि भारत मध्यस्थता की पहल करता है तो इससे बातचीत की नई राह खुल सकती है।
इस बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से Strait of Hormuz के आसपास बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण कई देशों को तेल आपूर्ति को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां मिलकर कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करती हैं तो हालात को बिगड़ने से रोका जा सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में संघर्ष और बढ़ता है या फिर बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है।
