देश की आर्थिक सेहत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे सरकार की राजस्व स्थिति मजबूत होती दिखाई दे रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार फरवरी के पहले पखवाड़े तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है, जो आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता और बेहतर अनुपालन का संकेत देता है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस अवधि में सकल कर संग्रह मजबूत रहा है और रिफंड जारी होने के बाद भी शुद्ध संग्रह में ठोस वृद्धि देखी गई है। करदाताओं द्वारा समय पर रिटर्न दाखिल करने और डिजिटल सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल ने इस बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कॉरपोरेट मुनाफे में स्थिरता और वेतनभोगी वर्ग की आय में सुधार ने भी प्रत्यक्ष कर संग्रह को सहारा दिया है।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि मजबूत टैक्स कलेक्शन से सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इससे बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत खर्च के लिए संसाधन जुटाना आसान होगा। साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि अर्थव्यवस्था में मांग और निवेश की गतिविधियां बनी हुई हैं।
कर रिफंड की तेज प्रक्रिया को भी इस सकारात्मक तस्वीर का हिस्सा माना जा रहा है। समय पर रिफंड जारी होने से करदाताओं का भरोसा बढ़ता है और टैक्स प्रशासन की पारदर्शिता मजबूत होती है। कुल मिलाकर, प्रत्यक्ष कर संग्रह का मौजूदा रुझान सरकार के लिए वित्तीय स्थिरता की दिशा में उत्साहजनक संकेत दे रहा है और आगामी बजट लक्ष्यों को हासिल करने की उम्मीद को बल प्रदान कर रहा है।
