लद्दाख के दुर्गम इलाके से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां भारतीय सेना का एक ‘चीता’ हेलीकॉप्टर (Cheetah Helicopter) अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह हेलीकॉप्टर श्योक नदी के पास उड़ान भरते समय सीधे एक पहाड़ी से जा टकराया। गनीमत यह रही कि इस भीषण हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सेना के एक डिवीजन कमांडर (मेजर जनरल रैंक के अधिकारी) पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि हेलीकॉप्टर उड़ा रहे दोनों पायलटों को गंभीर चोटें आई हैं।
महज 15 मिनट में पहुँचाई गई मदद
यह दुर्घटना 20 मई को दिन के समय हुई। हादसे की खबर मिलते ही भारतीय सेना तुरंत एक्शन मोड में आ गई और महज 15 से 20 मिनट के भीतर ही क्रैश साइट पर आपातकालीन सहायता और रेस्क्यू टीम भेज दी गई। मलबे से तीनों सैन्य अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तुरंत हेलीकॉप्टर के जरिए लेह स्थित सैन्य अस्पताल पहुँचाया गया, जहां घायल पायलटों का इलाज चल रहा है।
मौसम था साफ, कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश
सैन्य सूत्रों का कहना है कि जिस वक्त यह दुर्घटना हुई, उस समय लद्दाख में मौसम पूरी तरह से साफ था और विजिबिलिटी (दृश्यता) से जुड़ी कोई समस्या नहीं थी। खराब मौसम न होने के बावजूद हेलीकॉप्टर सीधे पहाड़ी से कैसे टकराया, इसकी तकनीकी वजहों को लेकर अभी सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं। सेना ने हादसे के असली और सटीक कारणों का पता लगाने के लिए आधिकारिक तौर पर कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (उच्च स्तरीय जांच) के आदेश जारी कर दिए हैं।
सेना का पुराना ‘चीता’ बेड़ा फिर आया विवादों में
इस ताजा हादसे के बाद भारतीय सेना के पुराने हो रहे हेलीकॉप्टर फ्लीट (बेड़े) की सुरक्षा को लेकर रक्षा गलियारों में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। चीता एक सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर है, जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना दशकों से लद्दाख और सियाचिन जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले व दुर्गम इलाकों में कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, आर्मी एविएशन के पास मौजूदा समय में करीब 190 चीता, चेतक और चीतल हेलीकॉप्टर्स हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से 5 हेलीकॉप्टर तो 50 साल से भी ज्यादा पुराने हैं, जबकि लगभग 130 हेलीकॉप्टर्स 30 से 50 साल की अवधि पूरी कर चुके हैं। रक्षा विशेषज्ञ काफी समय से इन पुराने हेलीकॉप्टर्स को आधुनिक विमानों से बदलने की मांग कर रहे हैं।
