fbpx
  Previous   Next
HomePoliticsबिहार में NDA की प्रचंड जीत का चाणक्‍य कौन? किस रणनीति से...

बिहार में NDA की प्रचंड जीत का चाणक्‍य कौन? किस रणनीति से महागठबंधन को कर दिया चारों खाने चित

पीएम मोदी–नीतीश की विश्वसनीयता, महिलाओं को 10 हजार की सहायता और बूथ तक कामगारों को पहुंचाने की रणनीति ने जीत पक्की की. आरएसएस का ज़मीनी नेटवर्क भी बड़ी जीत का आधार बना.

बिहार चुनाव की तूफानी जीत के ऐसे तो कई हीरो हैं जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू, मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का बेदाग चेहरा और चुनावी रणनीति के जादूगर कहे जाने वाले गृह मंत्री शाह और चुनावी अभियान को जमीन तक ले जाने वाले केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं. लेकिन इन सबसे अलग एक शख़्स है जिस पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री शाह ने भरोसा करके काफी पहले ही बिहार की कमान सौंप दी थी जिसने ना केवल बिहार में बीजेपी की जमीन को और मजबूत किया बल्कि सहयोगी दलों को भी साधने का काम किया.

image 60

बीजेपी बिहार प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को जब हरियाणा से हटाकर बिहार जैसे जटिल प्रदेश की जिम्‍मेदारी दी गई तो कई राजनीतिक विश्लेषकों की भौंहें तन गईं और आलोचनाओं की लाइन लगा दी कि महाराष्ट्र में किस कदर बिहारियों का अपमान वहां की राजनीति के मद्देनजर होता है और ऊपर से महाराष्ट्रियन नेता को बिहार का प्रभारी बनाकर बीजेपी ने आग में घी डालने का काम किया है. लेकिन वसीम बरेलवी ने लिखा है- “जहां रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा किसी चराग का अपना मका नहीं होता…”

image 61

छात्र राजनीति से मंझे हुए नेता विनोद तावड़े को विद्यार्थी परिषद से ही रहे अपने पुराने वरिष्ठ साथी क्षेत्रीय संगठन मंत्री नागेन्द्र नाथ और चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान का साथ मिलने से काम करने का फ़्री हैंड मिला और तालमेल बैठाने में भी सफलता मिली और यही कारण था कि केन्द्रीय नेतृत्व के साथ कई अहम मुद्दों पर चुनावी रणनीति को नीचे तक समयबद्ध तरीके से ले जाने में सफलता मिली. इसमें कोई शक नहीं कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जिस तरह से 10 हजार रूपये उनके एकाउंट में डाले गये उसने आधी आबादी को एनडीए की जीत की राह प्रशस्त कर दी लेकिन तूफ़ानी जीत की रणनीति को भी समझना होगा.

image 62

एनडीए का जातिगत समीकरण- सूत्रों के मुताबिक गृहमंत्री शाह के निर्देश पर चुनाव से बहुत पहले विनोद तावड़े ने कई बैठकें कीं और सभी 243 सीटों पर जातिगत समीकरण का पता लगाया और यह सुनिश्चित किया कि अगर सीटें गठबंधन को भी मिलती हैं, तो भाजपा द्वारा तय की गई जाति का ही उम्मीदवार होना चाहिए और आखिरकार धर्मेन्द्र प्रधान, सम्राट चौधरी के साथ मिल कर सहयोगी दलों को मनाया और  95% सीटों पर ऐसा ही हुआ.

image 63

विधानसभाओं में पहली बार एनडीए सम्मेलन- इसके साथ ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में पहली बार एनडीए सम्मेलन कराये गये जिससे सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव से पहले ही बेहतर तालमेल बनाने में आसानी हुई, जिससे एनडीए कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा रहा.

चिराग पासवान और जेडीयू को साधा – एक रणनीतिकार ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 2020 में चिराग ने जदयू को नुकसान पहुँचाया, इसलिए हमने उनकी आकलन के हिसाब से ज़्यादा सीटों की माँग भी मान ली क्योंकि इस बात की परवाह नहीं थी कि चिराग कितनी सीटें जीतेंगे बल्कि हमारा ध्यान 6% पासवान वोटों पर था, जो हमेशा से उनका समर्थन करते रहे हैं.इसके अलावा हमने हर सीट पर और छोटे स्तर पर भी दूसरे राज्यों के नेताओं को तैनात किया.

image 64

पीएम मोदी – सीएम नीतिश का जादू- पीएम मोदी-सीएम नीतीश की विश्वसनीयता भी बहुत बड़ा कारण इस जीत के पीछे है क्योंकि वो जो कहते हैं वो पूरा करते हैं. जबकि विपक्ष कई राज्यों में अपने वादे पूरा करने में नाकाम रहा है.

कुशवाह -राजपूत समीकरण पर फ़ोकस- इसके साथ ही मगध और शाहबाद क्षेत्र में पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा को साथ लाने का साहसिक फ़ैसला किया ताकि राजपूत और कुशवाहा एक साथ आ सकें और उसका परिणाम अब सामने है हालाँकि पैर छूने वाली तस्वीर दिखा कर विपक्षी दलों ने बाँटने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब रहे.

image 65

पीके को इग्नोर करने की रणनीति- चुनावी रणनीति के तहत पीके को महत्व नहीं दिया गया, इसलिए किसी भी भाजपा नेता ने प्रशांत किशोर के आरोपों पर ज़्यादा निशाना नहीं साधा. क्योंकि भाजपा की सोच यही थी कि अगर हम उन पर प्रतिक्रिया देंगे तो उन्हें ज़्यादा तवज्जो मिलेगी और उनकी प्रासंगिकता बढ़ेगी.

संकल्प पत्र में वंचित तबकों पर फ़ोकस- भाजपा को एक बात का एहसास हुआ कि राज्य के अंदरूनी इलाकों में  कुछ वर्ग ऐसे भी है जिन्हें नए हवाई अड्डों, राष्ट्रीय राजमार्गों और बुनियादी ढाँचे के विकास आदि के कारण ज़्यादा लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्हें कम से कम अभी तो कुछ बुनियादी मदद की ज़रूरत है – जेब में कुछ पैसे और राशन, ताकि जब तक अन्य बुनियादी ढाँचागत विकास परियोजनाएँ उन्हें लाभ पहुँचाना शुरू न कर दें, तब तक वे अपना जीवन चला सकें. इसके लिए विशेष तौर पर ध्यान दिया गया और संकल्प पत्र में शामिल किया गया. संकल्प पत्र के समय NDA के नेताओं ने विशेष तौर पर ध्यान दिया क्योंकि सभी को पता था कि प्रधानमंत्री मोदी इन घोषणाओं पर कड़ी नज़र रखते हैं ताकि वे पूरी हों और यह कोई रेवड़ी या मुफ़्त की बात न हो.

image 66

बिहार के कामगारों को वोटिंग वाले दिन बूथ तक लाना – इसके साथ ही अलग अलग बीजेपी शासित राज्यों में काम कर रहे बिहार के कामगारों को चुनाव के समय उनके गांव तक भिजवाने की रणनीति ने भी बड़ी भूमिका निभाई. सूत्रों के मुताबिक हरियाणा में करीब 8 से 10 लाख बिहार के कामगार काम करते हैं जिनमें से 5 लाख लोगों को चुनाव के समय भिजवाने का काम किया गया और पार्टी और संघ की तरफ से सुनील शर्मा को इसका कॉर्डीनेटर बनाया गया था. इसी तरह से हर बीजेपी/एनडीए शासित राज्यों में ये किया गया.

संघ के साथ कदमताल – इसके अलावा जीत का एक महत्वपूर्ण फेक्टर RSS भी रहा जिसने पर्दे के पीछे रह कर तूफ़ानी जीत की गाथा में अहम इबारत लिखी और इसकी पूरी कमान संघ के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने सँभाल रखी थी.  पीएम मोदी के कारण बढ़ा मत प्रतिशत- चुनाव का दिलचस्प पहलू ये भी रहा कि जहां जहां प्रधानमंत्री मोदी की जनसभाएं हुई वहां वहां वोटिंग परसटेंज काफ़ी बढ़ा. दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता की रही डिमांड- इसके अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की डिमांड बिहार चुनाव में पीएम मोदी, गृहमंत्री शाह के बाद सबसे ज्यादा रही.

image 67

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

More News

गुवाहाटी में पीएम मोदी का कांग्रेस पर प्रहार, नॉर्थ ईस्ट के विकास पर जोर

असम की राजधानी Guwahati में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को केंद्र सरकार की...

वैलेंटाइन डे पर सुकेश का नया दाव, जैकलीन फर्नांडीज को गिफ्ट किया प्राइवेट जेट

दिल्ली की मंडोली जेल में बंद कथित ठग Sukesh Chandrasekhar ने वैलेंटाइन डे के मौके पर एक बार फिर बॉलीवुड अभिनेत्री Jacqueline Fernandez के...

सोना-चांदी में तेज गिरावट से बाजार में हलचल, सोना 25000, चांदी 1.40 लाख रुपये ग‍िरा

फरवरी के दूसरे सप्ताह में सर्राफा बाजार में अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों दोनों को चौंका दिया है। महीने की शुरुआत...

RELATED NEWS

IndiGo पर चला DGCA का हंटर, ठोका 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को हालिया उड़ान अव्यवस्थाओं के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा...

महंगाई भत्ते को लेकर बढ़ी उम्मीदें, 8वें वेतन आयोग से पहले अहम संकेत

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच एक बार फिर महंगाई भत्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लगातार बढ़ती जीवन लागत...

अमेरिकी लोकतंत्र की कसौटी बना वेनेजुएला संकट, सत्ता संतुलन की नई लड़ाई शुरू

वेनेजुएला संकट को लेकर अमेरिकाकी आंतरिक राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। वॉशिंगटन में हुए हालिया घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया...