पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और खाड़ी क्षेत्र में बने अस्थिर हालातों के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव साफ नजर आ रहा है। ऐसे समय में रूस ने भारत को कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है। मॉस्को की ओर से संकेत दिया गया है कि यदि खाड़ी क्षेत्र से आने वाली आपूर्ति प्रभावित होती है, तो रूस अतिरिक्त मात्रा में तेल उपलब्ध कराने को तैयार है।
ऊर्जा बाजार में यह हलचल उस समय तेज हुई है जब Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर खतरा मंडरा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस व्यापार का अहम केंद्र है और भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का अवरोध सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल देश के पास करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक लगभग 50 दिनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने स्पष्ट किया है कि भारत अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर सक्रियता से काम किया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्रालय ने देशभर में ईंधन की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इसके साथ ही, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी आयात रणनीति में विविधता लाते हुए रूस, अफ्रीकी देशों और लैटिन अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी संबंध मजबूत किए हैं।

रूस की यह पेशकश ऐसे समय आई है जब पहले अमेरिका के साथ हुए समझौतों के चलते रूसी तेल आयात को सीमित करने के संकेत दिए गए थे। लेकिन बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने ऊर्जा कूटनीति की दिशा को फिर से मोड़ दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है, तो भारत को बहु-स्रोत रणनीति अपनानी पड़ेगी। रूस की पेशकश से अल्पकालिक राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आपूर्ति मार्गों और ऊर्जा स्रोतों में और विविधता लाना जरूरी होगा।
