केरल विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से ठीक तीन दिन पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। इडुक्की में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए खड़गे ने गुजरात के मतदाताओं की तुलना केरल के लोगों से की, जिसमें उन्होंने गुजरात के लोगों को ‘अनपढ़’ (Illiterate) करार दिया। खड़गे ने कहा कि गुजरात के लोग कम शिक्षित होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों में आसानी से आ जाते हैं और गुमराह हो जाते हैं, जबकि केरल के लोग ‘अत्यधिक बुद्धिमान और साक्षर’ हैं, जिन्हें भ्रमित करना नामुमकिन है। उनके इस बयान ने न केवल गुजरात की अस्मिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक नई बहस को भी जन्म दे दिया है।

खड़गे ने अपने संबोधन में केवल प्रधानमंत्री मोदी को ही नहीं, बल्कि केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन और मोदी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और केरल के मुख्यमंत्री परोक्ष रूप से दिल्ली के नियंत्रण में काम कर रहे हैं। खड़गे के इस ‘अनपढ़’ वाले तंज पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस का यह बयान किसी एक नेता की गलती नहीं, बल्कि ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ वाली सोच की सोची-समझी रणनीति है। त्रिवेदी ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस महात्मा गांधी और सरदार पटेल की धरती का अपमान करके दक्षिण भारत में वोट बटोरना चाहती है?
भाजपा ने कांग्रेस पर ‘विभाजनकारी राजनीति’ का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी लगातार उत्तर और दक्षिण के बीच खाई पैदा करने की कोशिश कर रही है। त्रिवेदी ने याद दिलाया कि इससे पहले भी कांग्रेस नेताओं ने टैक्स वितरण और बिहार के लोगों के डीएनए को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। 9 अप्रैल को होने वाले केरल चुनाव से पहले आए इस बयान ने एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के साथ-साथ एनडीए (NDA) के बीच मुकाबले को और भी कड़ा बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खड़गे का यह बयान गुजरात और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है, जबकि केरल में भी जागरूक मतदाता इस ‘साक्षरता बनाम अनाक्षरता’ की जंग को किस तरह लेंगे, यह 4 मई के नतीजों में ही साफ होगा।
