प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2026 में हुई इजरायल यात्रा को लेकर लंबे समय से चल रही कयासबाजियों पर सरकार ने आधिकारिक तौर पर विराम लगा दिया है। राज्यसभा में एक लिखित जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी की इजरायल यात्रा का ईरान पर हुए सैन्य हमलों से कोई लेना-देना नहीं था और न ही उस दौरान इस तरह की किसी भी कार्रवाई पर कोई चर्चा हुई थी। आईयूएमएल (IUML) सांसद अब्दुल वहाब के सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने कहा कि यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच फोकस पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, कृषि और डिजिटल भुगतान जैसे द्विपक्षीय समझौतों पर केंद्रित था।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर-शोर से चल रही थी कि क्या प्रधानमंत्री को 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले की पूर्व जानकारी थी, क्योंकि उनकी यात्रा ठीक उसके कुछ दिन पहले ही संपन्न हुई थी। इस पर सरकार ने पूरी तरह स्पष्टता बरतते हुए कहा कि दौरे के दौरान किसी भी क्षेत्रीय सैन्य हमले से संबंधित विषय पर न तो कोई बात हुई और न ही भारत को इसकी अग्रिम जानकारी साझा की गई थी। विदेश राज्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार पैनी नजर रखे हुए है। युद्ध की शुरुआत से ही प्रधानमंत्री मोदी इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, अमेरिका और खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनी रहे।
इस संकट के समय में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। सरकार ने संसद में यह भी साझा किया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक करीब 4.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया है। इसके अलावा, भारत ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर भी खाड़ी देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही बाधित न हो। विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री का लगातार कूटनीतिक संवाद यह दर्शाता है कि भारत इस युद्ध में एक तटस्थ और जिम्मेदार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसका उद्देश्य हिंसा को रोकना और नागरिकों को बचाना है।
