प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी में बने ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन करते हुए इसे भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत बताया। इस आधुनिक परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एकीकृत रूप से स्थापित किया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल एक नई इमारत का उद्घाटन नहीं, बल्कि शासन प्रणाली में सोच और संरचना के बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने इसे “विकसित भारत” के संकल्प की दिशा में एक ठोस कदम बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में प्रशासन को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और जन-केंद्रित बनाया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश ने जिन इमारतों से शासन चलाया, वे औपनिवेशिक दौर की विरासत थीं। अब नए भारत के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को दर्शाने वाले ढांचे तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हों।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक कार्यसंस्कृति, डिजिटल एकीकरण और बेहतर समन्वय से नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। सेवा तीर्थ परिसर को पर्यावरण अनुकूल डिजाइन और उन्नत सुरक्षा मानकों के साथ तैयार किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल प्रशासनिक ढांचे में केंद्रीकरण और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का दावा है कि इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा।
