नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध के बीच भारत में गहराते ऊर्जा संकट और आपूर्ति संबंधी चिंताओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल, 27 मार्च 2026 को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक हाई-लेवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। शाम 6:30 बजे होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बिठाना है, ताकि युद्ध के वैश्विक प्रभावों से भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।

इस बैठक में विशेष रूप से उन राज्यों को शामिल नहीं किया गया है जहाँ वर्तमान में विधानसभा चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है। इन राज्यों (केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी) के मुख्य सचिवों के साथ कैबिनेट सचिवालय अलग से समन्वय करेगा। प्रधानमंत्री इस दौरान राज्यों को स्पष्ट निर्देश दे सकते हैं कि वे अपने यहाँ ईंधन (पेट्रोल, डीजल, एलपीजी) और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की निरंतर निगरानी करें। हाल ही में संसद में दिए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ‘मेड इन इंडिया’ जहाजों और रणनीतिक तेल भंडारों का रोडमैप पेश किया था, जिसे अब जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए राज्यों का सहयोग मांगा जा रहा है।

बैठक के एजेंडे में ‘कालाबाजारी और जमाखोरी’ पर नकेल कसना सबसे ऊपर है। प्रधानमंत्री ने पहले ही साफ कर दिया है कि संकट के समय कुछ शरारती तत्व पैनिक फैलाकर कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी कर सकते हैं, जिसे हर हाल में रोकना होगा। सरकार ने युद्ध के प्रभावों से निपटने के लिए एक ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ और सात ‘एम्पवर्ड ग्रुप्स’ का गठन किया है, जो ईंधन, फर्टिलाइजर और महंगाई पर नजर रख रहे हैं। कल की बैठक में राज्यों से इन समूहों के साथ मिलकर काम करने और रसद (Logistics) की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने की अपील की जाएगी।
