अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान में हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं। ईरान की राहत एजेंसी ने दावा किया है कि बीते कुछ दिनों में देशभर के 153 शहरों में 1,000 से अधिक हमले दर्ज किए गए हैं। इन हमलों में अब तक 787 लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की सूचना है।
राजधानी तेहरान के पश्चिमी इलाके करज और मध्य ईरान के इस्फहान सहित कई प्रमुख शहरों में लगातार विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। कई औद्योगिक प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हमलों का दायरा 500 से अधिक स्थानों तक फैल चुका है।

दूसरी ओर, ईरान की जवाबी कार्रवाई में इजराइल के कई शहरों पर मिसाइलें दागी गईं, जिनमें 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने भी उत्तरी इजराइल पर हमले किए, जिसके बाद इजराइली सेना ने लेबनान में कार्रवाई की। लेबनान में 52 लोगों के मारे जाने की खबर है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन में भी हमलों के चलते जानमाल का नुकसान हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच चुका है।

परमाणु ठिकानों को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency ने कहा है कि Natanz Nuclear Facility को कुछ नुकसान पहुंचा है, लेकिन फिलहाल किसी रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा नहीं है। इजराइल ने आरोप लगाया है कि ईरान गुप्त रूप से भूमिगत परमाणु ढांचे का विस्तार कर रहा था, हालांकि इसके ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि सैन्य अभियान कई सप्ताह तक जारी रह सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त सैन्य संसाधन हैं और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा।
उधर, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में कुछ महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाने का दावा किया है। कतर और सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर भी हमलों की खबर है, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
सबसे अधिक चिंता की बात होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता है। यहां जहाजों पर हमलों और मार्ग अवरुद्ध होने की चेतावनी के बाद वैश्विक तेल कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो विश्व ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात फिलहाल और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
