देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई गाइडलाइंस के तहत सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एआई से तैयार भ्रामक कंटेंट को लेकर सख्त जवाबदेही तय की गई है। सरकार का मानना है कि तकनीक के दुरुपयोग से न केवल अफवाहें फैलती हैं, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और व्यक्तिगत सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।
सरकार की नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को संदिग्ध या अवैध एआई कंटेंट पर पहले से कहीं तेज कार्रवाई करनी होगी। किसी भी तरह की शिकायत या सूचना मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को बेहद सीमित समय में कंटेंट हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले तक इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था, जिससे नुकसान फैलने की आशंका बनी रहती थी।

नई गाइडलाइंस यह भी साफ करती हैं कि हर डिजिटल बदलाव को एआई कंटेंट नहीं माना जाएगा। सामान्य तकनीकी सुधार, अनुवाद या विजुअल एडिटिंग जैसे काम तब तक गलत नहीं माने जाएंगे, जब तक उनका उद्देश्य किसी को गुमराह करना न हो। सरकार का जोर उन सामग्रियों पर है जो किसी व्यक्ति, घटना या दस्तावेज को इस तरह पेश करती हैं कि वह पूरी तरह असली प्रतीत हो।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए अब यह भी जरूरी होगा कि वे यूजर्स को नियमित रूप से नियमों की जानकारी दें और एआई से बनी सामग्री को पहचानने के लिए तकनीकी उपाय अपनाएं। सरकार का मानना है कि इन कदमों से ऑनलाइन दुनिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा मजबूत होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत के डिजिटल कानूनों को भविष्य की तकनीक के अनुरूप ढालने की कोशिश है, ताकि नवाचार को रोका न जाए, लेकिन उसके गलत इस्तेमाल पर सख्ती जरूर हो।
