प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े बयान अब कानूनी मोर्चे पर आम आदमी पार्टी के लिए नई चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर उन याचिकाओं को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिनमें अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने अपने खिलाफ अलग-अलग मुकदमा चलाने की मांग की थी। अदालत के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि दोनों नेताओं को एक ही आपराधिक मानहानि ट्रायल का सामना करना होगा।

हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के आदेशों को बरकरार रखते हुए यह संकेत दिया कि मामला केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर एक सार्वजनिक संस्था की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। न्यायालय ने माना कि जिन परिस्थितियों में बयान दिए गए, उनमें आपसी संबंध और उद्देश्य की समानता दिखाई देती है, इसलिए इन्हें अलग-अलग मामलों के रूप में देखना उचित नहीं है।
यह विवाद तब गहराया था जब प्रधानमंत्री की डिग्री से जुड़े एक पुराने आदेश को अदालत ने रद्द कर दिया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सार्वजनिक मंचों और डिजिटल माध्यमों पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी थीं। इन्हीं टिप्पणियों को गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला आने वाले ट्रायल की दिशा तय करेगा। एक साथ सुनवाई होने से यह मामला अब ज्यादा तेजी से आगे बढ़ सकता है और राजनीतिक बयानबाजी के कानूनी परिणामों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे संस्थानों की गरिमा से जोड़कर पेश कर रहा है। अब निगाहें ट्रायल कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि मामला किस मोड़ पर आगे बढ़ता है।
