देश में रसोई गैस की मांग में लगातार बढ़ोतरी और वैश्विक ऊर्जा हालात के बीच केंद्र सरकार ने गैस वितरण व्यवस्था को संतुलित करने के लिए नया कदम उठाया है। सरकार ने संकेत दिया है कि जिन घरों में पहले से पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें सिलेंडर आधारित गैस प्रणाली से धीरे-धीरे अलग किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य एलपीजी की उपलब्धता उन इलाकों तक सुनिश्चित करना है जहां अभी पाइप्ड गैस नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार घरेलू गैस की मांग हाल के समय में तेजी से बढ़ी है, जिससे कई शहरों में सिलेंडर की आपूर्ति पर दबाव देखने को मिला है। ऐसे में Liquefied Petroleum Gas और Piped Natural Gas के उपयोग को लेकर नई नीति लागू करने की तैयारी की गई है। सरकार का मानना है कि जिन घरों में पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता कम हो सकती है।
नीतिगत बदलाव के तहत संबंधित एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि जिन उपभोक्ताओं के पास पाइपलाइन गैस की सुविधा है, वे उसी का उपयोग प्राथमिक रूप से करें। इससे सिलेंडर की मांग कम होगी और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक एलपीजी की आपूर्ति बेहतर तरीके से पहुंच सकेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश में गैस खपत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर घरेलू सप्लाई पर भी पड़ता है। इसी कारण सरकार लंबे समय से शहरों में पाइप्ड गैस नेटवर्क को विस्तार देने पर जोर दे रही है, ताकि घरेलू रसोई गैस के लिए सिलेंडरों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सके।
सरकार ने उपभोक्ताओं से यह भी अपील की है कि वे गैस आपूर्ति को लेकर अफवाहों से बचें और जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करने से परहेज करें। अधिकारियों के मुताबिक देश में घरेलू गैस की सप्लाई जारी है और वितरण व्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
