दुनिया एक बार फिर कोरोना के पुराने दुश्मन के नए रूप से रूबरू हो रही है। अमेरिका समेत 20 से अधिक देशों में कोविड-19 के SARS-CoV-2 BA.3.2 वेरिएंट के मामलों में अचानक उछाल देखा गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी (CDC) के अनुसार, यह वेरिएंट तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर एक बार फिर चिंता की लहर दौड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन पर लगभग 75 म्यूटेशन पाए गए हैं, जिसका सीधा मतलब है कि यह वायरस बहुत तेजी से अपना रूप बदल रहा है और हमारे इम्यून सिस्टम को चकमा देने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, भारत के संदर्भ में राहत की बात यह है कि अभी तक देश में इस नए वेरिएंट का कोई सक्रिय मामला सामने नहीं आया है। महामारी विशेषज्ञ डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, भारत में बड़े स्तर पर टीकाकरण (Vaccination) हो चुका है, जिससे लोगों के शरीर में वायरस के खिलाफ मजबूत प्रतिरोधक क्षमता विकसित है। भले ही यह नया वेरिएंट संक्रमण फैलाने में सक्षम हो, लेकिन वैक्सीन ले चुके लोगों में इसके लक्षण काफी हल्के रहने की उम्मीद है। फिलहाल किसी भी प्रकार के ‘गंभीर खतरे’ की आशंका कम है, इसलिए जनता को पैनिक करने की जरूरत नहीं है।
जहाँ तक मास्क और बूस्टर डोज के दौर की वापसी का सवाल है, विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल मास्क पहनना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, अस्पताल, सार्वजनिक परिवहन और अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में एहतियातन मास्क लगाना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। वैक्सीन और बूस्टर डोज के मामले में डॉ. किशोर का कहना है कि चूंकि आबादी का बड़ा हिस्सा पहले ही वैक्सीनेटेड है, इसलिए तत्काल प्रभाव से किसी नई बूस्टर मुहिम की जरूरत महसूस नहीं होती। मौजूदा वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह न रोक पाएँ, तब भी वे मरीज को अस्पताल पहुँचने जैसी गंभीर स्थिति से बचाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
