दुनिया की ‘ऊर्जा लाइफलाइन’ कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के कब्जे और समुद्री नाकेबंदी ने विश्व राजनीति में भूचाल ला दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाने के लिए अब दुनिया के 22 शक्तिशाली देश एक मंच पर आ गए हैं। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों के साथ-साथ यूएई और बहरीन जैसे खाड़ी देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिछाई गई समुद्री सुरंगों (Mines), ड्रोन हमलों और मिसाइल खतरों को तुरंत रोके। इन देशों ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज की बंदी न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह वैश्विक शांति के लिए सीधा खतरा है।

इस कूटनीतिक दबाव के बीच, अमेरिका ने सैन्य मोर्चे पर ईरान की कमर तोड़ना शुरू कर दिया है। यूएस सेंट्रल कमांड के एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान के 8,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है। पिछले तीन हफ्तों में 130 ईरानी जहाजों को समुद्र में डुबो दिया गया है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी नौसेना के सबसे बड़े विनाश के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी हमलों ने ईरान की लड़ाकू क्षमता को काफी हद तक कम कर दिया है, लेकिन फिर भी होर्मुज से होने वाला 20% वैश्विक तेल और गैस का व्यापार वर्तमान में पूरी तरह ठप पड़ा है।
22 देशों के इस गठबंधन ने संकल्प लिया है कि वे होर्मुज में ‘सुरक्षित नौवहन’ बहाल करने के लिए हर संभव योगदान देंगे। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने के फैसले का स्वागत करते हुए इन देशों ने संकेत दिया है कि यदि ईरान ने स्वेच्छा से रास्ता नहीं खोला, तो सामूहिक सैन्य हस्तक्षेप का विकल्प भी मेज पर हो सकता है। फिलहाल, कच्चा तेल और गैस ले जा रहे सैकड़ों कमर्शियल जहाज खाड़ी के पानी में फंसे हुए हैं, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में आग लगी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठबंधन ईरान पर उस ‘अंतिम प्रहार’ की तैयारी है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अनिवार्य हो चुका है।
