ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना अब आपकी जेब पर और भारी पड़ने वाला है क्योंकि फूड डिलीवरी दिग्गज ज़ोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने प्रति ऑर्डर फीस को ₹12.50 से बढ़ाकर ₹14.90 कर दिया है, जो सीधे तौर पर ग्राहकों के फाइनल बिल को प्रभावित करेगा। दिलचस्प बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब ईंधन की बढ़ती कीमतों और एलपीजी के दामों ने पहले ही लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ा दिया है। ज़ोमैटो की इस रणनीतिक चाल का असर शेयर बाजार पर भी सकारात्मक दिखा, जहाँ इसकी पैरेंट कंपनी ‘ईटरनल’ के शेयरों में शुक्रवार को करीब 3 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया और शेयर ₹236.70 के स्तर तक जा पहुँचा।

फूड डिलीवरी बाजार में ज़ोमैटो और स्विगी के बीच की प्रतिस्पर्धा अब मुनाफे की जंग में बदलती दिख रही है। जहाँ स्विगी पहले से ही लगभग ₹14.99 चार्ज कर रहा है, वहीं ज़ोमैटो ने भी अब अपनी फीस को उसी के बराबर ला खड़ा किया है। हालांकि, बाजार में ‘रैपिडो’ जैसे नए खिलाड़ियों की एंट्री, जो बिना किसी प्लेटफॉर्म फीस के फूड डिलीवरी का वादा कर रहे हैं, इन स्थापित कंपनियों के लिए भविष्य में चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां धीरे-धीरे छोटी बढ़ोतरी करके अपने रेवेन्यू मॉडल को मजबूत कर रही हैं, क्योंकि लाखों ऑर्डर्स पर ₹2.40 की मामूली वृद्धि भी अंततः करोड़ों के मुनाफे में तब्दील हो जाती है।
ग्राहकों के लिए यह खबर थोड़ी निराशाजनक हो सकती है क्योंकि डिलीवरी चार्ज और टैक्स के अलावा यह फिक्स चार्ज अब अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। महंगाई के इस दौर में जब आम उपभोक्ता अपने खर्चों में कटौती कर रहा है, तब टेक-प्लेटफॉर्म्स द्वारा वसूला जाने वाला यह अतिरिक्त शुल्क बाहरी खाने के शौकीनों के बजट को बिगाड़ सकता है। फिलहाल, बाजार के निवेशक इस फैसले को कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी के लिए मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या उपभोक्ता इस बढ़ती लागत के बावजूद अपनी ऑर्डरिंग फ्रीक्वेंसी को बरकरार रखते हैं या नहीं।
