अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर यह दावा दोहराया है कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु टकराव टल गया था। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांत कराने में भूमिका निभाई, जिनमें दक्षिण एशिया का तनाव भी शामिल था।
ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने उनसे बातचीत में माना था कि यदि उस समय हस्तक्षेप नहीं होता तो हालात गंभीर हो सकते थे। हालांकि इस बयान के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक दस्तावेज या विवरण साझा नहीं किया।

इस दावे को लेकर भारत का रुख पहले की तरह स्पष्ट रहा है। नई दिल्ली लगातार यह कहता आया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी सैन्य या कूटनीतिक निर्णय में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की भूमिका नहीं रही। भारतीय पक्ष का मानना है कि सभी कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आकलन के आधार पर उठाए गए थे।
पृष्ठभूमि में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुआ आतंकी हमला रहा, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सीमापार आतंकी ढांचों को निशाना बनाने की कार्रवाई की थी। उस समय दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मंचों पर इस तरह के दावों का राजनीतिक महत्व तो होता है, लेकिन कूटनीतिक दृष्टि से आधिकारिक पुष्टि और तथ्यों का महत्व अधिक होता है। भारत-पाक संबंधों में उतार-चढ़ाव का इतिहास लंबा रहा है और किसी भी घटना को लेकर अलग-अलग देशों के बयान अक्सर अलग दृष्टिकोण पेश करते हैं।
