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इस्लामाबाद में ‘शांति’ या फिर ‘महा-जंग’? मीटिंग से पहले ट्रंप का ईरान को आखिरी अल्टीमेटम!

मध्य-पूर्व के बारूदी ढेरों पर दुनिया की नजरें टिकी हैं, जहां शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान सीजफायर मीटिंग से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक ‘अंतिम चेतावनी’ जारी की है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने युद्धविराम की शर्तों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका ‘पहले से कहीं अधिक बड़ा और विनाशकारी’ हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर आक्रामक लहजे में कहा कि अमेरिकी सेना ने अपने गोला-बारूद के जखीरे को फिर से भर लिया है और वे ईरान के करीब तैनात होकर अंतिम आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ट्रंप का यह बयान इस्लामाबाद में होने वाली उस महत्वपूर्ण बैठक को और अधिक पेचीदा बनाता दिख रहा है, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष गालिबफ का आमना-सामना होगा।

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इस तनावपूर्ण माहौल के बीच पाकिस्तान की भूमिका एक ‘मध्यस्थ’ के रूप में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है, जहाँ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर इस बैठक का संचालन करेंगे। हालांकि, मीटिंग से पहले ही दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई चौड़ी हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल द्वारा बेरूत में किए गए कथित नरसंहार और सीजफायर के उल्लंघन का मुद्दा उठाकर अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाए हैं। ईरानी संसद अध्यक्ष गालिबफ ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि शर्तें तोड़ी गईं, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोकने के अपने वादे से पीछे हट सकता है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना अभी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बना हुआ है।

अमेरिकी प्रवक्ता कैरोलिना लैविट ने पुष्टि की है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बैठक में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व करेंगे, जहाँ मुख्य एजेंडा सीजफायर का सख्ती से पालन और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना होगा। ट्रंप का यह कहना कि “अमेरिका वापस आ गया है” और उनके सैनिक ईरान के चारों ओर तैनात हैं, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वॉशिंगटन अब कूटनीति के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी मेज पर रखे हुए है। क्या शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक मध्य-पूर्व में शांति ला पाएगी या ट्रंप की धमकियाँ ईरान के साथ एक और बड़े सैन्य टकराव का सबब बनेंगी? इसका फैसला आने वाले कुछ ही घंटों में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल वार्ता के नतीजों से होगा।

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