भारतीय क्रिकेट के गढ़ माने जाने वाले इंदौर में रविवार का दिन मेहमान टीम न्यूजीलैंड के नाम रहा। जबरदस्त आत्मविश्वास, धैर्यपूर्ण बल्लेबाज़ी और अनुशासित गेंदबाज़ी के दम पर कीवी टीम ने न सिर्फ निर्णायक मुकाबला जीता, बल्कि भारत दौरे पर वनडे क्रिकेट में एक नई मिसाल भी कायम कर दी। यह जीत न्यूजीलैंड के लिए इसलिए खास रही क्योंकि इससे पहले भारतीय सरज़मीं पर ऐसी सफलता उनके खाते में नहीं थी।
मैच की शुरुआत में भारतीय गेंदबाज़ों ने दबाव बनाया, लेकिन इसके बावजूद न्यूजीलैंड के मध्यक्रम ने हालात को अपने पक्ष में मोड़ लिया। साझेदारी के दौरान दिखा संयम और स्ट्राइक रोटेशन ने भारतीय कप्तानी के सामने चुनौती खड़ी कर दी। अंतिम ओवरों में तेज़ रन बटोर कर कीवी टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया, जिसने भारत के सामने मुश्किल लक्ष्य रख दिया।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने आक्रामक अंदाज़ अपनाया, लेकिन लगातार गिरते विकेटों ने लय तोड़ दी। इसके बावजूद दर्शकों को विराट कोहली की एक और यादगार पारी देखने को मिली, जिसने स्टेडियम में उम्मीदों को जिंदा रखा। मध्यक्रम से मिले सीमित सहयोग के कारण टीम इंडिया दबाव में आ गई और अंततः मैच हाथ से फिसल गया।
न्यूजीलैंड की फील्डिंग भी इस मुकाबले में निर्णायक साबित हुई। कैच पकड़ने में चुस्ती और रन रोकने की प्रतिबद्धता ने भारतीय बल्लेबाज़ों पर अतिरिक्त दबाव बनाया। गेंदबाज़ों ने सही लेंथ और विविधता से भारत की वापसी के रास्ते बंद कर दिए।

इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने न केवल सीरीज अपने नाम की, बल्कि यह भी दिखा दिया कि वह विदेशी परिस्थितियों में भी बड़े मौके भुनाने में सक्षम है। भारतीय टीम के लिए यह हार आत्ममंथन का संकेत है, वहीं कीवी टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली उपलब्धि।
