फरवरी के दूसरे सप्ताह में सर्राफा बाजार में अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों दोनों को चौंका दिया है। महीने की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोने और चांदी के दाम अब तेजी से नीचे आए हैं, जिससे बाजार का रुख पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।
फरवरी की शुरुआत में सोने ने अपनी ऐतिहासिक ऊंचाई को छुआ था, लेकिन आज की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. फरवरी के पहले दिन 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1,81,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास थी. आज वैलेंटाइन डे पर सोना गिरकर 1,56,000 के स्तर पर पहुंच गया है. यानी इन 14 दिनों में सोने की कीमतों में करीब 25000 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी कमी आई है.

चांदी में सोने से भी ज्यादा बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली है. चांदी ने निवेशकों को जितना मुनाफा दिया था, पिछले 10 दिनों में उतनी ही तेजी से गिरावट भी दिखाई है. महीने की शुरुआत में चांदी 3.50 लाख से 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बीच झूल रही थी. आज चांदी का भाव घटकर 2.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब आ गया है. यानी देखा जाए तो चांदी में पिछले दो हफ्तों में करीब 1.40 लाख रुपये तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.
ताजा कारोबारी आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमतों में दो हफ्तों के भीतर भारी नरमी दर्ज की गई है। जहां पहले सोना ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा था, वहीं अब प्रति 10 ग्राम कीमत में बड़ी कटौती देखने को मिल रही है। इसी तरह चांदी के दाम भी रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसलकर काफी नीचे आ गए हैं, जिससे थोक बाजार में सुस्ती का माहौल है।

विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और बड़े निवेशकों की मुनाफावसूली ने इस गिरावट को बढ़ावा दिया है। वैश्विक संकेतों के साथ घरेलू मांग में आई अस्थिरता भी कीमतों पर असर डाल रही है। शादी-विवाह के सीजन से पहले आई इस गिरावट को ज्वेलरी कारोबारियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
सर्राफा विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में यह करेक्शन अस्थायी भी हो सकता है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी बनी हुई है। अगर अंतरराष्ट्रीय हालात फिर बदलते हैं तो सोना-चांदी दोबारा मजबूती पकड़ सकते हैं। वहीं छोटे निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में बड़े फैसले न लें और कीमतों की चाल पर नजर बनाए रखें।
फिलहाल, बाजार में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए अवसर बनकर आई है जो लंबे समय से ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी टाल रहे थे। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संकेत और घरेलू मांग यह तय करेंगे कि यह गिरावट स्थायी है या फिर कीमतें दोबारा नई ऊंचाई छूने की तैयारी में हैं।
