नए साल की शुरुआत में जब सोना और चांदी ने ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छुआ था, तब निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला था। लेकिन फरवरी के मध्य तक आते-आते बाजार की दिशा बदल गई और दोनों कीमती धातुओं में तेज करेक्शन दर्ज हुआ। रिकॉर्ड स्तर से नीचे आने के बाद अब सर्राफा बाजार में नई रणनीतियों पर चर्चा तेज हो गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी Multi Commodity Exchange of India पर हालिया कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव जारी रहा। चांदी, जिसने जनवरी के अंत में अभूतपूर्व ऊंचाई हासिल की थी, अब अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही है। हालांकि बीते सप्ताह इसमें सीमित सुधार देखने को मिला, लेकिन यह अब भी अपने शिखर मूल्य से काफी सस्ती बनी हुई है।

29 जनवरी को Silver Price तूफानी तेजी के साथ भागते हुए इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर के पार निकला था और 4,20,048 रुपये तक पहुंच गई थी. हालांकि, इस स्तर तक पहुंचने के बाद इसकी कीमत तेजी से कम होती चली गई. इसके बाद चांदी अपने 29 जनवरी के ऑल टाइम हाई 4,20,048 रुपये प्रति किलो से अब भी 1,67,104 रुपये सस्ती है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 13 फरवरी को चांदी 2,44,360 रुपये पर बंद हुई थी, जो शुक्रवार तक बढ़कर 2,52,944 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई यानी हफ्तेभर में 8,584 रुपये की तेजी दर्ज की गई. चांदी अभी भी 1.67 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है, तो वहीं 10 Gram 24 Karat Gold 36,000 रुपये से ज्यादा सस्ता है. दरअसल, 13 फरवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी लगातार गिरावट के साथ 2,44,360 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई और हफ्तेभर के बाद बीते शुक्रवार ये 2,52,944 रुपये पर पहुंच गई.
सोने की कीमतों में भी इसी तरह की चाल नजर आई। शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है, लेकिन ऐतिहासिक उच्च स्तर की तुलना में दाम अभी भी कम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक आगे की दिशा तय करेंगे।
घरेलू बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी है। Indian Bullion Jewellers Association के आंकड़ों के अनुसार, सोने और चांदी के भाव में सप्ताह के दौरान सीमित तेजी दर्ज की गई है। ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि शादियों के सीजन के मद्देनजर मांग में सुधार की संभावना है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर हो सकती है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार की अगली चाल अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू मांग पर निर्भर करेगी।
