मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz), पूरी तरह से एक युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो चुका है। ईरान द्वारा दी गई मिसाइल हमलों की धमकी के बाद पिछले 24 घंटों में इस समुद्री रास्ते से कच्चे तेल का एक भी टैंकर नहीं गुजरा है, जिससे दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। सैकड़ों जहाजों ने डर के मारे समुद्र के बीच ही लंगर डाल दिए हैं। लेकिन इस भयानक तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता की खबर आई है। भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकरों— ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’— को इस खतरनाक रास्ते को पार करने की विशेष अनुमति मिल गई है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है।

शिपिंग डेटा और सूत्रों के अनुसार, जहाँ दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (LNG) का प्रवाह ठप पड़ा है, वहीं भारत ने अपने इन दो जहाजों को निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। यह सफलता ऐसे समय में मिली है जब देश के भीतर एलपीजी की आपूर्ति पिछले तीन हफ्तों से दबाव में है। कच्चे माल की कमी के कारण होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को होने वाली सप्लाई में भारी कटौती की गई थी, ताकि घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। भारत अपनी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत आयात इसी रास्ते से करता है, ऐसे में इन दो टैंकरों का सुरक्षित निकलना भारतीय रसोई के लिए संजीवनी साबित हो सकता है।
हालाँकि, जमीनी हकीकत अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। खाड़ी के पानी में अभी भी कई जहाज फंसे हुए हैं और अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे कुछ टैंकर वापस ईरानी जलक्षेत्र की ओर लौट रहे हैं। भारत के केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी फिलहाल स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति अभी भी उनकी जरूरत का महज पाँचवां हिस्सा ही बहाल हो पाई है, लेकिन भारतीय टैंकरों को मिलने वाला यह ‘विशेष रास्ता’ संकेत देता है कि भारत ने युद्धरत देशों के बीच अपना एक सुरक्षित गलियारा बनाने में कामयाबी हासिल की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये जहाज बिना किसी बाधा के अपनी मंजिल तक पहुँच पाते हैं।
