देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को हालिया उड़ान अव्यवस्थाओं के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। विस्तृत जांच के बाद डीजीसीए ने साफ कहा है कि संकट केवल मौसमी या तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि प्रबंधन स्तर पर की गई गंभीर चूकों का नतीजा था। इसी आधार पर एयरलाइन पर करोड़ों रुपये का आर्थिक दंड और सख्त सुधारात्मक निर्देश जारी किए गए हैं।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिगो ने उड़ान संचालन में जरूरत से ज्यादा आक्रामक योजना अपनाई, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ता चला गया। क्रू मैनेजमेंट, फ्लाइट शेड्यूलिंग और सॉफ्टवेयर आधारित ऑपरेशनल कंट्रोल में तालमेल की कमी साफ तौर पर सामने आई। डीजीसीए का कहना है कि समय रहते जोखिमों का आकलन नहीं किया गया और यात्रियों की सुविधा के बजाय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को प्राथमिकता दी गई।
नियामक संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए इंडिगो को अपने ऑपरेशनल ढांचे में व्यापक बदलाव करने होंगे। इसी उद्देश्य से एयरलाइन से एक बड़ी बैंक गारंटी जमा करने को कहा गया है, जिससे निगरानी और सुधार प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। डीजीसीए की नजर में यह केवल सजा नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और सिस्टम को टिकाऊ बनाने का कदम है।

इस कार्रवाई का असर इंडिगो के शीर्ष प्रबंधन तक पहुंचा है। नियामक ने साफ संकेत दिया है कि उड़ान संचालन और संकट प्रबंधन में जिम्मेदारी तय होगी और लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। साथ ही, यह संदेश भी दिया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है कि डीजीसीए की यह कार्रवाई पूरे एविएशन सेक्टर के लिए चेतावनी है। बढ़ते यात्री दबाव और तेजी से विस्तार के बीच अगर सिस्टम मजबूत नहीं होंगे, तो ऐसे संकट दोहराए जा सकते हैं। आने वाले समय में इंडिगो द्वारा किए जाने वाले सुधारों पर नियामक की कड़ी नजर बनी रहेगी।
