पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद रविवार को उस वक्त दहशत में डूब गई, जब शिया समुदाय के एक धार्मिक स्थल पर हुए आत्मघाती विस्फोट ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। शहजाद टाउन इलाके में स्थित तरलाई इमामबाड़ा में दोपहर के समय हुए धमाके में दर्जनों लोगों की जान चली गई, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धार्मिक स्थल के प्रवेश द्वार के पास अचानक तेज धमाका हुआ, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। चारों ओर धुएं का गुबार फैल गया और चीख-पुकार के बीच लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। कई घायल जमीन पर पड़े थे, जिन्हें स्थानीय लोग और स्वयंसेवक अस्पताल पहुंचाने में जुट गए।

घटना के तुरंत बाद राजधानी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। पुलिस, रेस्क्यू टीमों और सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और आसपास की सड़कों को सील कर दिया गया। अस्पतालों में इमरजेंसी लागू की गई, जहां डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को अतिरिक्त ड्यूटी पर बुलाया गया। प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
यह हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब पाकिस्तान पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। हाल के महीनों में धार्मिक और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाने की घटनाओं ने आम लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। इस्लामाबाद जैसे हाई-सिक्योरिटी शहर में इस तरह की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देश के शीर्ष नेतृत्व ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। राष्ट्रपति और मंत्रियों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच एजेंसियां हमले के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस हमले को सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज में डर और विभाजन फैलाने का हथकंडा हैं, जिनका जवाब एकजुटता और शांति से ही दिया जा सकता है।
