केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच एक बार फिर महंगाई भत्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लगातार बढ़ती जीवन लागत के बीच हाल के आर्थिक संकेत यह इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। बीते कुछ महीनों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ने यह भरोसा बढ़ाया है कि सरकार द्वारा डीए में संशोधन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

वेतन ढांचे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा महंगाई दर और औद्योगिक श्रमिक सूचकांक के रुझान यह दर्शाते हैं कि डीए की मौजूदा सीमा जल्द पार हो सकती है। ऐसे में जनवरी 2026 से प्रभावी बढ़ोतरी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। हालांकि आधिकारिक घोषणा बाद में होती है, लेकिन इसका असर कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर पूर्व प्रभाव से पड़ता है, जिससे एरियर के रूप में अतिरिक्त राशि मिलने की उम्मीद बनती है।

इस बीच 8वें वेतन आयोग के गठन ने भी इस चर्चा को और मजबूत कर दिया है। नए वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि भविष्य में महंगाई भत्ता किस तरह मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। जानकारों के अनुसार, जब तक नया फिटमेंट फैक्टर लागू नहीं होता, तब तक डीए की मौजूदा प्रणाली जारी रहेगी और इसी दौरान होने वाली बढ़ोतरी कर्मचारियों के लिए खास मायने रखेगी।
कुल मिलाकर, मौजूदा आर्थिक माहौल में डीए को लेकर बनी सकारात्मक धारणा ने लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उम्मीद का माहौल बनाया है। अब सभी की निगाहें आने वाले आधिकारिक आंकड़ों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
