लगातार कई सत्रों तक रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाने के बाद आखिरकार बुलियन बाजार में जोरदार करेक्शन देखने को मिला है। जिस चांदी ने निवेशकों को कुछ ही दिनों में जबरदस्त रिटर्न का सपना दिखाया था, वही अब अचानक भारी गिरावट के साथ सुर्खियों में है। सोने की कीमतों में भी एक ही दिन में ऐसी फिसलन आई है, जिसने बाजार की दिशा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

कमोडिटी बाजार से मिले संकेत बताते हैं कि ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने आक्रामक मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसी का नतीजा यह रहा कि चांदी के वायदा भाव में बड़ी कटौती दर्ज की गई और कीमतें रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गईं। सोना भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा और इसकी कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। जानकारों के मुताबिक यह गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही तेज़ी के बाद स्वाभाविक सुधार का हिस्सा मानी जा रही है।
सोना और चांदी की ऐतिहासिक बढ़त ने आम लोगों की टेंशन बढ़ा दी थी लेकिन एक ही दिन में सारा खेल बदल गया है। दरअसल, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गुरुवार को चांदी ने ₹4,20,048 प्रति किलोग्राम का नया शिखर छुआ था। रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के ठीक एक दिन बाद मुनाफावसूली ने बुलियन बाजार को झकझोर कर रख दिया। मार्च में समाप्त होने वाले चांदी के वायदा भाव में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 3,32,002 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। यह गिरावट सिर्फ 24 घंटे में लगभग 21 प्रतिशत (88,046 रुपये प्रति किलोग्राम) की है।
MCX पर अप्रैल में समाप्त होने वाले सोने के वायदा भाव में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1,67,406 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया। एक दिन पहले ही सोने के वायदा भाव ने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का नया उच्चतम स्तर छुआ था। इसका मतलब है कि सोने के वायदा भाव में सिर्फ 24 घंटे में 13 प्रतिशत (25,690 रुपये प्रति 10 ग्राम) की गिरावट आई।
दिल्ली समेत प्रमुख सर्राफा बाजारों में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। ज्वैलर्स के अनुसार, बीते कुछ सत्रों की तेजी ने खरीदारी को काफी हद तक रोक दिया था, लेकिन कीमतें गिरते ही ग्राहकों की पूछताछ फिर से बढ़ने लगी है। हालांकि व्यापारी अभी भी सतर्क नजर आ रहे हैं, क्योंकि वैश्विक संकेत और डॉलर की चाल आगे भी कीमतों में उतार-चढ़ाव ला सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में हलचल और बड़े फंड्स की बिकवाली ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। तकनीकी रूप से भी सोना और चांदी दोनों ही ओवरबॉट जोन में थे, ऐसे में करेक्शन आना तय माना जा रहा था। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के रुख पर टिकी रहेंगी, जो बाजार की अगली चाल तय कर सकते हैं।
