पश्चिम बंगाल के चुनावी महासंग्राम के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए ‘नारी शक्ति’ को केंद्र में ला खड़ा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को महिला आरक्षण अधिनियम में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक कदम को अमली जामा पहनाने के लिए सरकार ने 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। माना जा रहा है कि इस संशोधन के जरिए आरक्षण को 2029 के आम चुनाव से ही प्रभावी ढंग से लागू करने का रास्ता साफ होगा। बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सरकार की यह सक्रियता सीधे तौर पर महिला मतदाताओं को साधने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।

संसद के विशेष सत्र से पहले भाजपा ने जमीन पर अपनी तैयारी तेज कर दी है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष नेताओं के साथ वर्चुअल बैठकें कर इस महा-अभियान की रूपरेखा तैयार की है। रणनीति यह है कि महिला आरक्षण के संदेश को देश के हर कोने, खासकर बंगाल की गलियों तक पहुँचाया जाए। इसी कड़ी में 13 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं महिला कार्यकर्ताओं, उद्यमियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को संबोधित करेंगे। भाजपा का लक्ष्य है कि महिलाओं को यह समझाया जाए कि उनका सशक्तीकरण केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार इसे कानून बनाकर सुनिश्चित कर रही है।
इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए, विशेष सत्र के दौरान संसद की विजिटर गैलरी में देश की नामचीन महिला हस्तियों और स्थानीय निकायों की महिला प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। वे अपनी आँखों से लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत में महिलाओं के हक में होने वाले इस बड़े फैसले को देखेंगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, अन्नपूर्णा देवी और बीएल संतोष जैसे दिग्गज नेता इस अभियान की कमान संभाल रहे हैं। संदेशखाली जैसी घटनाओं के बाद बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है, ऐसे में भाजपा का यह ‘नारी शक्ति’ कार्ड ममता बनर्जी के महिला वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है।
