भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। 9 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनावों में असम, केरलम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मतदाताओं ने मतदान के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, पुडुचेरी ने 89.20% मतदान के साथ पूरे देश को पीछे छोड़ दिया है, वहीं असम के दलगांव निर्वाचन क्षेत्र में अविश्वसनीय 94.57% वोटिंग दर्ज की गई है। भारी संख्या में उमड़ी महिलाओं और बुजुर्ग मतदाताओं की भीड़ ने साफ कर दिया है कि इस बार जनता का फैसला बेहद चौंकाने वाला और निर्णायक हो सकता है।
असम की 126 सीटों पर इस बार 85.10% मतदान हुआ, जो 2021 के मुकाबले लगभग 3% अधिक है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और विपक्ष के बड़े चेहरे गौरव गोगोई के बीच चल रही इस वर्चस्व की जंग में जलुकबारी, जोरहाट और धुबरी जैसी हॉट सीटों पर जबरदस्त गहमागहमी रही। वहीं, केरलम की 140 सीटों पर 77.50% वोटर्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ और कांग्रेस नीत यूडीएफ के बीच चल रहे इस मुकाबले में इस बार भाजपा की बढ़ती ताकत ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। पलक्कड़ और त्रिशूर जैसी सीटों पर मतदाताओं का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि वे विकास और बदलाव के मुद्दों पर मुखर हैं।
पुडुचेरी में मतदान का नजारा सबसे अलग और आधुनिक रहा। यहां चुनाव आयोग की एक अनूठी पहल के तहत एक मतदान केंद्र पर रोबोट को तैनात किया गया था, जिसने फूलों से मतदाताओं का स्वागत किया। एनडीए के लिए सत्ता बरकरार रखने की चुनौती और विपक्ष के स्थानीय मुद्दों के बीच 294 उम्मीदवारों की किस्मत अब ईवीएम में कैद हो चुकी है। कुल मिलाकर, इन तीनों क्षेत्रों में 1899 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला अब 4 मई को आने वाले चुनावी नतीजों से होगा। भारी मतदान का यह प्रतिशत अक्सर सत्ता विरोधी लहर या फिर किसी खास लहर का संकेत माना जाता है, जिसने सभी राजनीतिक विश्लेषकों को अब गणित सुलझाने पर मजबूर कर दिया है।
