पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹24 प्रति लीटर और रोड व इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (Cess) में ₹36 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। सरकार की इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर डीजल की कमी को रोकना और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उछाल का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है।
इस फैसले का सीधा असर डीजल के निर्यात (Export) पर पड़ेगा। सरकार ने डीजल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी को ₹21.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर अब ₹55.5 प्रति लीटर कर दिया है। इसके साथ ही, हवाई जहाज के ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी ड्यूटी को ₹29.5 से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को फिलहाल शून्य पर ही बरकरार रखा गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
दरअसल, 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य हमलों के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी गई है। हालांकि 8 अप्रैल को दो सप्ताह के संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमति बनी थी, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं अभी भी बरकरार हैं। सरकार को अंदेशा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ऊंची कीमतों के लालच में तेल कंपनियां घरेलू आपूर्ति के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दे सकती हैं। इसी ‘विंडफॉल’ मुनाफे पर अंकुश लगाने और देश के भीतर खेती व परिवहन के लिए जरूरी डीजल की सप्लाई सामान्य रखने के लिए मोदी सरकार ने शुल्कों का यह कड़ा घेरा तैयार किया है।
