देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आने वाला भारत युवाशक्ति के साहस और नवाचार से आकार लेगा। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे जोखिम लेने से न डरें और अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाएं, क्योंकि सरकार उनके प्रयासों में भागीदार है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की नई पीढ़ी केवल नौकरी तलाशने वाली नहीं, बल्कि अवसर पैदा करने वाली पीढ़ी है। तकनीक, स्टार्टअप और रचनात्मक क्षेत्रों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब युवा राष्ट्र को पहले रखते हैं, तब व्यक्तिगत सफलता अपने आप देश की सफलता में बदल जाती है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने युवाओं को मानसिक गुलामी से बाहर निकलने का संदेश दिया और कहा कि आत्मनिर्भर सोच ही विकसित भारत की असली पहचान बनेगी। उनका यह संदेश युवाओं में नई ऊर्जा और विश्वास भरने वाला माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश की विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है. करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना… ये अपनेआप में अभूतपूर्व है. मुझे अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, आपके सामर्थ्य पर भरोसा है, इसलिए हमने एक अलग राह चुनी. हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए एक के बाद एक नई स्कीम्स बनाई. यहीं से स्टार्ट अप रिवोल्यूशन ने भारत में असली गति पकड़ी. भारत के Zen-G रिस्क लेने से पीछे न हटें, सरकार उनके साथ है.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज ऑरेंज इकॉनमी यानि कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है. बीते दशक में बदलाव का, रिफॉर्म का जो सिलसिला हमने शुरु किया… वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है. इन रिफॉर्म्स के केंद्र में हमारी युवाशक्ति है. इसलिए देश के हर युवा को, संकल्प लेकर गुलामी की मानसिकता से देश को बाहर निकालना है.
